बाराबंकी में CPI का शताब्दी समारोह, बेरोज़गारी–भुखमरी पर सरकार को घेरा
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बाराबंकी | ब्यूरो रिपोर्ट | 26 दिसंबर 2025
आज से ठीक सौ वर्ष पूर्व देश की आज़ादी और सामाजिक न्याय के संघर्ष को दिशा देने वाले क्रांतिकारी संगठन भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) की स्थापना हुई थी। इसी ऐतिहासिक अवसर पर बाराबंकी में पार्टी के सौवें स्थापना दिवस का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें वक्ताओं ने मौजूदा सामाजिक-आर्थिक हालात, बढ़ती बेरोज़गारी, भुखमरी और जनविरोधी नीतियों पर तीखा प्रहार किया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल सदस्य डॉ. रामचंद्र सरस ने कहा कि सौ साल पहले जब कम्युनिस्ट पार्टी की नींव रखी गई, उसी समय ब्रिटिश साम्राज्यवाद ने अपनी सत्ता बचाने के लिए मुखबिरी और दमनकारी तंत्र भी खड़ा किया था। उन्होंने कहा कि आज देश में कम्युनिस्ट विचारधारा के कमजोर होने का नतीजा है कि बेरोज़गारी, महंगाई और भुखमरी का संकट गहराता जा रहा है।
डॉ. सरस ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “जनता की समस्याओं का स्थायी समाधान केवल कम्युनिस्ट विचार और संगठन से ही संभव है, इसके अलावा कोई विकल्प नहीं है।”
गोरखपुर विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. राजेश मल्ल ने कहा कि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने ब्रिटिश साम्राज्यवाद के खिलाफ संघर्ष में अग्रणी भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि पार्टी ने राजा-महाराजाओं, सामंतों और शोषक वर्गों के खिलाफ खड़े होकर मजदूरों और किसानों के हक की लड़ाई लड़ी, जो आज भी उतनी ही प्रासंगिक है।
पार्टी के राज्य परिषद सदस्य रणधीर सिंह सुमन ने वर्तमान सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि यह सरकार कहती कुछ है और करती कुछ और है। उन्होंने इसे “मुखौटावादी सरकार” बताते हुए कहा कि जनता के सामने झूठे वादे किए जा रहे हैं।
जिला सचिव बृजमोहन वर्मा ने आरोप लगाया कि अरावली की पहाड़ियों से लेकर जल, जंगल और जमीन तक बड़े पूंजीपतियों, खासकर अडानी समूह को सौंपा जा रहा है, जिससे आम जनता के संसाधनों की खुली लूट हो रही है।
किसान सभा अध्यक्ष विनय कुमार सिंह ने कहा कि मौजूदा हालात में साम्यवादी आंदोलन को आगे बढ़ाने के अलावा जनता के पास कोई दूसरा रास्ता नहीं है। वहीं, राज्य परिषद सदस्य प्रवीण कुमार ने कहा कि सरकार मजदूरों को बारह घंटे काम करने के लिए मजबूर करने की सोच बना रही है, जो सीधे-सीधे मजदूर विरोधी नीति है।
कार्यक्रम में मोहम्मद तारिक खान, शिवदर्शन वर्मा, मुनेश्वर सहित कई नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भी अपने विचार रखे और कम्युनिस्ट आंदोलन को मजबूत करने का आह्वान किया।
स्थापना दिवस के अवसर पर डॉ. रामचंद्र सरस ने केक काटकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इसके बाद भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के संस्थापकों और आज़ादी के महानायकों कार्ल मार्क्स, श्रीपद अमृत डांगे, मौलाना हसरत मोहानी, मुज़फ्फर अहमद, मलयपुरम सिंगरावेलु चेट्टियार, ह्यूग लेस्टर हचिंसन, सच्चिदानंद विष्णु घाटे, गंगाधर अधिकारी, फिलिप स्प्रेट, कल्पना दत्त सहित अन्य क्रांतिकारियों के चित्रों पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई।
कार्यक्रम की अध्यक्षता मोहम्मद कादिर हसन ने की। आयोजन में बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता और समर्थक मौजूद रहे, जिन्होंने सौ साल की विरासत को आगे बढ़ाने और जनसंघर्ष तेज करने का संकल्प लिया।
