मनरेगा योजना में मची है लूट, अधिकारियों की मिली भगत से प्रतिदिन लाखों का हो रहा बंदरबांट
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Saddam Husain | ITN | 23 February 2026
भ्रष्टाचार की परत खुलते ही डीसी मनरेगा ने साधी चुप्पी, मीडिया का नहीं उठा रहे फोन |
उरई जालौन : जिस योजना को गांव के गरीब के हाथों में काम देने के लिए बनाया गया था, जालौन के नदीगांव ब्लॉक में वही योजना भ्रष्ट अधिकारियों और बिचौलियों के लिए ‘सोने का अंडा देने वाली मुर्गी’ बन गई है। जिले में मनरेगा के तहत प्रतिदिन लाखों रुपये का बंदरबांट हो रहा है, और हैरानी की बात यह है कि पारदर्शिता के लिए बनाया गया सरकारी सिस्टम ही अब भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा हथियार बन चुका है।

सरकार ने पारदर्शिता के लिए NMMS ऐप अनिवार्य किया था, ताकि कार्यस्थल से मजदूरों की लाइव फोटो और हाजिरी अपलोड हो सके। लेकिन जालौन के ‘सिस्टम’ ने इसमें भी सेंध लगा दी है। एक ही मजदूर की तस्वीर को अलग-अलग विकास कार्यों में दिखाकर फर्जी हाजिरी भरी जा रही है।
धरातल पर काम शून्य है, लेकिन ऐप पर फर्जी मस्टररोल और फर्जी फोटो के जरिए सरकारी खजाना खाली किया जा रहा है।
भ्रष्टाचार की यह दीमक डाबर माधौगढ़, पजौनिया, छिरिया खुर्द, डीहा, खैरावर, मौ, पराबर, राजेपुरा, सलैया खुर्द और सींगपुरा जैसे ग्राम पंचायतों को अपनी चपेट में ले चुकी है। इन गांवों में बिना एक ईंट हिले लाखों रुपये के भुगतान कागजों पर कर दिए गए हैं।
जब भ्रष्टाचार की परतें उखड़ने लगीं और मीडिया ने जवाब मांगा, तो जिम्मेदार अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गए। डीसी मनरेगा रामेंद्र सिंह कुशवाह ने इस मामले पर मीडिया के फोन रिसीव करना बंद कर दिया है। यह चुप्पी साफ इशारा करती है कि दाल में कुछ काला नहीं, बल्कि पूरी दाल ही काली है।
आखिर कब तक गरीब मजदूरों के हक पर डाका डाला जाता रहेगा, क्या जिले के उच्चाधिकारी इस ‘सिंडिकेट’ को तोड़ेंगे या फिर जांच के नाम पर फाइलों को दबा दिया जाएगा।
