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बलरामपुर: आईजीआरएस शिकायतों पर झूठी रिपोर्ट लगाकर पल्ला झाड़ने में माहिर CMO ऑफिस!

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रिपोर्ट : मिर्जा गुलाम जिलानी | आईटीएन | 12 जून 2026


बलरामपुर। उत्तर प्रदेश सरकार भ्रष्टाचार और अवैध कार्यों पर जीरो टॉलरेंस की नीति का दावा करती है, लेकिन बलरामपुर जिले का मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) कार्यालय सरकार की इस मंशा पर पानी फेरने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा है। जिले में आयुष और बीयूएमएस (BUMS) डिग्रीधारी डॉक्टर धड़ल्ले से खुद को ‘एलोपैथिक विशेषज्ञ’ या ‘MBBS’ की तरह पेश कर बड़ी-बड़ी और गंभीर बीमारियों के इलाज का ठेका ले रहे हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि जब इन फर्जीवाड़ों और अवैध क्लीनिकों के खिलाफ जागरूक नागरिक मुख्यमंत्री संदर्भ या आईजीआरएस (IGRS) पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराते हैं, तो सीएमओ कार्यालय धरातल पर कार्रवाई करने के बजाय कागजों पर ‘झूठी रिपोर्ट’ तैयार कर मामले का निस्तारण (निक्षेपण) कर देता है।

 

हाल ही में सामने आए सरकारी पत्राचार और आईजीआरएस आख्या के दस्तावेजों ने सीएमओ ऑफिस बलरामपुर की इस कार्यप्रणाली की कलई खोलकर रख दी है।

क्या है पूरा मामला?


दस्तावेजों के अनुसार, शिकायतकर्ता द्वारा आईजीआरएस संदर्भ संख्या 12157260087901 (दिनांक 29.05.2026) के माध्यम से जिले में संचालित अवैध एलोपैथिक चिकित्सा और फर्जी डॉक्टरों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई थी। इस शिकायत के निस्तारण के लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी बलरामपुर ने जिलाधिकारी (DM) को एक आख्या पत्र (पत्रांक: शिका०/आ०जांच/नि०/2026-27/4157, दिनांक 10 जून 2026) भेजा है, जिसमें शिकायत को बंद (निक्षेपित) करने का अनुरोध किया गया है।

सीएमओ ने इस आख्या का आधार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) श्रीदत्तगंज के अधीक्षक द्वारा सौंपी गई जांच रिपोर्ट को बनाया है। लेकिन जब इस जांच रिपोर्ट की जमीनी हकीकत देखी जाए, तो साफ पता चलता है कि विभाग केवल खानापूर्ति कर रहा है।

जांच रिपोर्ट की वो ‘थ्योरी’ जिस पर उठ रहे हैं गंभीर सवाल:


सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र श्रीदत्तगंज के अधीक्षक के पत्र संख्या अवैध/एलो०चि०संंख्या/2026-27/156-1 (दिनांक 10-06-2026) के तहत जो जांच आख्या तैयार की गई है, वह अपने आप में कई विरोधाभासों से भरी है:

मामला 1:  सील क्लीनिक का ताला टूटा मिला, फिर भी सिर्फ दोबारा सील कर छोड़ा


जांच टीम जब महदेइया बाजार स्थित ‘SP क्लीनिक’ (कथित डॉ. पिंकी जायसवाल) की जांच करने पहुंची, तो पूर्व में सील किए गए क्लीनिक का ताला और दरवाजा टूटा हुआ पाया गया। यह सीधे तौर पर प्रशासनिक आदेशों की अवहेलना और कानूनी अपराध है। लेकिन टीम ने इस पर कोई एफआईआर (FIR) दर्ज कराने या सख्त कानूनी कार्रवाई करने के बजाय, वहां मौजूद लोगों के इस बहाने को सच मान लिया कि “आंधी के कारण दरवाजा टूट गया था।” टीम ने बिना किसी ठोस कानूनी एक्शन के उसे दोबारा सील कर अपनी जिम्मेदारी से इतिश्री कर ली।

मामला 2 और 3 : BUMS डॉक्टर कर रहे एलोपैथिक दावों की प्रैक्टिस?


चमई बुजुर्ग स्थित खान क्लीनिक’ (डॉ. मोहसिन खान – BUMS) और श्रीदत्तगंज स्थित ‘फैमिली हेल्थ केयर’ (डॉ. मिन्हाज खान – BUMS) की जांच में टीम ने उनके पंजीकरण को ‘वैध’ करार दे दिया। रिपोर्ट में लिखा गया है कि वे अपनी पद्धति के अनुसार केवल ओपीडी (OPD) चलाते हैं और मरीज भर्ती नहीं करते।

बड़ा सवाल: क्षेत्र के लोगों का आरोप है कि ये आयुष और यूनानी डॉक्टर बोर्ड पर और अपनी प्रैक्टिस में एलोपैथिक दवाओं और बड़ी बीमारियों के इलाज का झांसा देते हैं, जिसका इलाज बड़े-बड़े स्पेशलिस्ट भी सोच-समझकर करते हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने केवल उनके बयानों को ही अंतिम सत्य मान लिया और जमीनी स्तर पर मरीजों से फीडबैक लेना भी जरूरी नहीं समझा।

जनता में भारी आक्रोश, कार्रवाई की मांग


स्थानीय नागरिकों और समाजसेवियों का कहना है कि बलरामपुर का स्वास्थ्य महकमा पूरी तरह से सुस्त पड़ चुका है। शिकायत होने पर पहले से ही क्लीनिक संचालकों को ‘मैनेज’ होने का समय दे दिया जाता है, और बाद में एक बनावटी रिपोर्ट तैयार कर उच्चाधिकारियों और आईजीआरएस पोर्टल को गुमराह कर दिया जाता है।


“जब तक इन फर्जी क्लीनिकों और नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले कथित डॉक्टरों पर एफआईआर दर्ज कर जेल भेजने जैसी सख्त कार्रवाई नहीं होगी, तब तक बलरामपुर की गरीब जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ होता रहेगा।”


अब देखना यह है कि आईजीआरएस पर लगी इस ‘झूठी आख्या’ और सीएमओ कार्यालय के इस ढुलमुल रवैए पर जिले के आला अधिकारी और शासन क्या संज्ञान लेते हैं।


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