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प्रधानाचार्य की ‘मैनेज’ रिपोर्ट: रामबल इंटर कॉलेज के भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने की कोशिश, अभिभावकों की जेब पर डकैती

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बलरामपुर| मिर्जा गुलाम जिलानी | आईटीएन न्यूज |


रेहरा बाजार (बलरामपुर) स्थानीय रामबल इंटर कॉलेज में नियमों की धज्जियां उड़ाकर अभिभावकों और बच्चों का आर्थिक शोषण करने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। विद्यालय में एनसीईआरटी (NCERT) के नियमों को ताक पर रखकर प्राइवेट पब्लिकेशन की महंगी किताबें थोपी जा रही हैं, जिससे गरीब अभिभावकों पर भारी वित्तीय बोझ पड़ रहा है। हैरानी की बात यह है कि इस गंभीर मामले की जाँच करने आए राजकीय इंटर कॉलेज (GIC) दारीचौरा के प्रधानाचार्य ने तथ्यों को उजागर करने के बजाय एक ‘गोलमोल’ रिपोर्ट प्रस्तुत कर विद्यालय प्रबंधन को बचाने का प्रयास किया है।

जाँच रिपोर्ट में ‘शादी’ का बहाना, भ्रष्टाचार को क्लीन चिट!


मीडिया संगठन द्वारा जनसुनवाई पोर्टल पर की गई शिकायत की जाँच GIC दारीचौरा के प्रधानाचार्य को सौंपी गई थी। प्रधानाचार्य ने अपनी रिपोर्ट में स्वीकार किया कि विद्यालय के 19 कर्मचारियों में से 10 के शैक्षिक दस्तावेजों का सत्यापन नहीं हो सका। इसके पीछे तर्क दिया गया कि ‘मैनेजर के घर शादी का कार्यक्रम’ होने के कारण दस्तावेज नहीं दिखाए गए। सवाल यह उठता है कि क्या सरकारी जाँच किसी के पारिवारिक आयोजन के अधीन होती है? बिना दस्तावेजों की जाँच किए प्रधानाचार्य ने किस आधार पर रिपोर्ट को फाइनल कर दिया?

अधूरा सच: सिर्फ कक्षा 9 और 10 तक सीमित रही जाँच


अभिभावकों का आरोप है कि विद्यालय प्रशासन ने जाँच टीम की आँखों में धूल झोंकने के लिए केवल कक्षा 9 और 10 में एनसीईआरटी की कुछ किताबें सजा रखी हैं, जबकि धरातल पर कक्षा 1 से लेकर 8 तक प्राइवेट पब्लिकेशन का मकड़जाल फैला हुआ है। जाँच अधिकारी ने जानबूझकर अन्य कक्षाओं का निरीक्षण नहीं किया, जिससे प्राइवेट किताबों के कमीशन के खेल पर पर्दा पड़ा रहे।

अभिभावकों में भारी रोष: कमीशनखोरी का शिकार हो रहा बचपन


नाम न छापने की शर्त पर क्षेत्र के अभिभावकों का कहना है कि प्राइवेट प्रकाशकों की किताबें बाजार भाव से तीन से चार गुना महंगी हैं। विद्यालय प्रबंधन और प्रकाशकों की जुगलबंदी के कारण बच्चों के बस्ते का बोझ और अभिभावकों के बजट का बोझ लगातार बढ़ रहा है। अयोग्य शिक्षकों द्वारा शिक्षण कार्य कराए जाने से छात्रों का भविष्य भी अंधकारमय हो रहा है।

जाँच रिपोर्ट को बताया 60% फर्जी


मीडिया संगठन सेंट्रल प्रेस काउंसिल ने इस रिपोर्ट को सिरे से खारिज करते हुए इसे ‘भ्रष्टाचार को संरक्षण देने वाली रिपोर्ट’ करार दिया है। संगठन का कहना है कि रिपोर्ट में 40% तथ्यों को मरोड़ा गया है और 60% जानकारी पूरी तरह गलत है। इस मामले में अब जिलाधिकारी बलरामपुर से उच्च स्तरीय जाँच और जाँच अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्यवाही की मांग की जा रही है।

मुख्य बिंदु जो जनता पूछेगी:


👉क्या प्रधानाचार्य दारीचौरा और स्कूल प्रबंधन के बीच कोई ‘सांठगांठ’ है?

👉क्या जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) ऐसी आधारहीन रिपोर्ट को स्वीकार करेंगे?

👉प्राइवेट किताबों से मिलने वाले मोटे कमीशन में किसका-किसका हिस्सा है?


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