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आठ सूत्रीय मांगों को लेकर लेखपालों ने समाधान दिवस का बहिष्कार, डीएम को सौंपा ज्ञापन

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वेतनमान उच्चीकरण, पदोन्नति, एसीपी-पेंशन सुधार व पद संरचना बढ़ाने की मांग; चेतावनी—समाधान न हुआ तो चरणबद्ध आंदोलन

✍🏻रिपोर्ट- आमिर हसन सिद्दीकी

उतरौला (बलरामपुर)। आठ सूत्रीय मांगों को लेकर तहसील उतरौला के लेखपालों ने शनिवार को आयोजित सम्पूर्ण समाधान दिवस का बहिष्कार करते हुए मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी विपिन जैन को सौंपा। ज्ञापन में प्रारंभिक वेतनमान उच्चीकरण, पदोन्नति अवसरों में वृद्धि, एसीपी एवं पेंशन विसंगतियों का निस्तारण, विभिन्न भत्तों में संशोधन, पदनाम परिवर्तन, अंतर्मंडलीय स्थानांतरण की सुविधा, बढ़ते भूमि विवादों के अनुरूप लेखपाल पदों की संख्या बढ़ाने और राजस्व सहायक व राजस्व पुलिस चौकी की व्यवस्था जैसी प्रमुख मांगें शामिल रहीं। संघ ने कहा कि फील्ड का अधिकतर कार्य मोटरसाइकिल से होता है, ऐसे में साइकिल भत्ता अव्यवहारिक है और इसे मोटरसाइकिल भत्ते में बदला जाए।

तहसील इकाई अध्यक्ष मदन मोहन श्रीवास्तव ने कहा कि जनसंख्या वृद्धि, शहरीकरण और भूमि विवादों में लगातार हो रही तेजी से लेखपालों का कार्यभार कई गुना बढ़ गया है, लेकिन पद संरचना और संसाधन वर्षों से जस के तस हैं।

मंत्री मनोज कुमार यादव ने कहा कि एसीपी और पेंशन से जुड़ी विसंगतियां लंबे समय से लंबित हैं तथा पदोन्नति के अवसर तत्काल बढ़ाए जाने चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शासन स्तर से त्वरित निर्णय नहीं हुआ, तो संघ आंदोलन को तेज करेगा।

ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि 05 अप्रैल 2024 को मुख्य सचिव के समक्ष सभी मुद्दों पर पृथक-पृथक पत्र प्रस्तुत किए गए थे। इसके बाद 13 दिसंबर 2024 को अध्यक्ष, राजस्व परिषद की अध्यक्षता में बैठक हुई, लेकिन समस्याओं के समाधान पर कोई ठोस निर्णय नहीं आया। लगातार पत्राचार के बावजूद समस्याएं वर्षों से लंबित हैं, जिससे लेखपाल संवर्ग स्वयं को उपेक्षित महसूस कर रहा है और आक्रोश बढ़ता जा रहा है।

संघ ने स्पष्ट किया कि यदि मांगों का शीघ्र निस्तारण नहीं हुआ, तो वे अतिरिक्त क्षेत्र छोड़ने, कार्य बहिष्कार, जनप्रतिनिधियों के आवास पर प्रदर्शन और राजस्व परिषद व विधानसभा पर धरना जैसे चरणबद्ध आंदोलनों के लिए बाध्य होंगे।
इस दौरान अंजू पांडेय, रमा श्रीवास्तव, रूबी वर्मा, उमेश शुक्ला सहित कई लेखपाल मौजूद रहे।


 


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