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बलरामपुर में शिक्षा माफिया और बुक डिपो की ‘साठगांठ’ का भंडाफोड़, सेंट्रल प्रेस काउंसिल के सर्वे में बड़ा खुलासा

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योगेंद्र त्रिपाठी | आईटीएन न्यूज | 07 मई 2026


सादुल्लाह नगर (बलरामपुर): शिक्षा के मंदिर को ‘पैसा छापने वाली फैक्ट्री’ बनाने वाले सिंडिकेट के खिलाफ सेंट्रल प्रेस काउंसिल ने बड़ा मोर्चा खोल दिया है। ताजा सर्वे में यह बात सामने आई है कि सादुल्लाह नगर स्थित कृष्णा बुक डिपो और करीब 100 से अधिक स्कूलों ने मिलकर अभिभावकों की जेब पर डकैती डालने का एक सुनियोजित जाल बुना है। लगभग 80 प्रतिशत की छूट पर मिलने वाली किताबें बच्चों को मात्र 10 प्रतिशत छूट देकर लूटा जा रहा है। जिसका मास्टरमाइंड कृष्णा बुक डिपो व अन्य लोगों को बताया जा रहा है। संगठन के पास कई स्कूलों की सूची है जहां कृष्णा बुक डिपो ने अपनी किताबें लगा रखी है।

300 की किताबों का सेट 3000 में: कमीशन का ‘खूनी’ खेल


सेंट्रल प्रेस काउंसिल द्वारा किए गए गुप्त सर्वे में चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई है। बाजार में जो किताबों का सेट 300 से 500 रुपये में उपलब्ध होनी चाहिए, उन्हें सिंडिकेट बनाकर 2000 से  लेकर 3500 रुपये तक में बेचा जा रहा है। आरोप है कि इन बुक डिपो द्वारा स्कूलों को मोटा ‘एडवांस कमीशन’ दिया गया है, ताकि स्कूल प्रबंधन केवल उसी दुकान से किताबें खरीदने के लिए अभिभावकों पर दबाव बनाएं या उनके स्कूलों से किताबें खरीदें।

गोदामों में छिपा है ‘काला साम्राज्य’


सूत्रों और सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक, सादुल्लाह नगर में  बुक डिपो के कई अवैध गोदाम हैं, जहाँ लाखों रुपये की किताबें जमाखोरी करके रखी गई हैं। बिना किसी पक्के बिल या रसीद के किताबें बेची जा रही हैं खुलेआम कानून की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, जिससे सरकार को भी राजस्व का बड़ा नुकसान हो रहा है।

क्या कहते हैं उत्तर प्रदेश सरकार के कड़े नियम?


उत्तर प्रदेश सरकार की ‘शुल्क विनियमन अधिनियम 2018’ की गाइडलाइन के अनुसार:
1. दुकान चुनने की आजादी: कोई भी स्कूल किसी विशेष दुकान का नाम नहीं ले सकता। स्कूल को 5 दुकानों की सूची देनी होगी, अभिभावक कहीं से भी खरीदने को स्वतंत्र हैं।
2. NCERT अनिवार्य: निजी स्कूलों को प्राथमिकता के आधार पर NCERT पुस्तकें लगानी चाहिए। निजी पब्लिशर्स की महंगी किताबें थोपना अपराध है।
3. कमीशनखोरी पर जेल: साठगांठ कर कीमतें बढ़ाने पर स्कूल की मान्यता रद्द करने और धोखाधड़ी (IPC की सुसंगत धाराओं) के तहत FIR का प्रावधान है।
4. GST और बिल: बिना रसीद सामान बेचना ‘कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट’ का उल्लंघन है।

सेंट्रल प्रेस काउंसिल जुटा रही साक्ष्य, शासन तक पहुंचेगी रिपोर्ट


मीडिया संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि वे इस मामले में अभिभावकों और कुछ जागरूक स्कूलों के साथ मिलकर पुख्ता साक्ष्य (ऑडियो/वीडियो और फर्जी पर्चियां) इकट्ठा कर रहे हैं। जल्द ही यह पूरी फाइल जिलाधिकारी (DM) बलरामपुर और मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश को सौंपी जाएगी ताकि इन ‘शिक्षा के व्यापारियों’ को सलाखों के पीछे भेजा जा सके।


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