श्रीदत्तगंज: मीटर रीडिंग से बिल तक—जिगना में क्या है पूरा खेल? जांच की उठी मांग
• मीटर रीडर मुशाहिद रजा के क्षेत्र में जारी बिलों का हो डिजिटल ऑडिट
• मौके की मीटर फोटो, रीडिंग और बिलिंग रिकॉर्ड का मिलान कर दोष मिलने पर कार्रवाई की मांग
कुतुबुद्दीन की विशेष रिपोर्ट
उतरौला (बलरामपुर)। जिगना (श्रीदत्तगंज) विद्युत उपकेंद्र क्षेत्र में मीटर रीडिंग और बिजली बिल तैयार करने की प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। उपकेंद्र में मीटर रीडर के पद पर तैनात मुशाहिद रजा की कार्यप्रणाली की जांच की मांग सामने आई है। मामला केवल किसी एक उपभोक्ता के बिल का नहीं, बल्कि इस बात की पड़ताल का है कि क्षेत्र में बिलिंग वास्तव में मौके पर मीटर देखकर की जा रही है या रिकॉर्ड के आधार पर औपचारिकता पूरी हो रही है।
•कितने घर पहुंचे, कितनी फोटो खींचीं?
जांच का सबसे अहम बिंदु यही है। संबंधित मीटर रीडर के लॉगिन से पिछले महीनों में कितनी रीडिंग दर्ज की गईं और उनमें कितने मामलों में मीटर की फोटो अपलोड हुई? हर बिल से जुड़ी फोटो की तारीख और लोकेशन उपलब्ध है या नहीं? जिन बिलों में फोटो नहीं है, वहां रीडिंग किस आधार पर दर्ज की गई?
विभाग के उपलब्ध दस्तावेज में मीटर रीडर के लिए उपभोक्ता परिसर पर जाकर रीडिंग लेने और बिल तैयार करने के लिए मीटर की फोटो कैप्चर करने की प्रक्रिया का उल्लेख है। ऐसे में जिगना क्षेत्र के रिकॉर्ड की पड़ताल इन सवालों का ठोस जवाब दे सकती है।
•बिल में रीडिंग कुछ और, मीटर पर कुछ और तो नहीं?
पड़ताल की वास्तविकता जांचने के लिए विभाग को कुछ उपभोक्ताओं के घरों पर अचानक भौतिक सत्यापन कराना चाहिए। मौके पर मीटर में दर्ज वर्तमान रीडिंग, पिछले बिल की रीडिंग और अगली बिलिंग में दर्ज रीडिंग का तुलनात्मक परीक्षण हो। साथ ही यह भी देखा जाए कि सिस्टम में अपलोड फोटो उसी मीटर की है और वह वास्तविक बिलिंग तिथि से संबंधित है या नहीं।
• बिल सुधार के नाम पर भी उठ रहे सवाल
बिल अधिक आने के बाद सुधार कराने की प्रक्रिया को लेकर भी उपभोक्ताओं के बीच असंतोष की चर्चा है। इसकी जांच का एक अलग पहलू यह होना चाहिए कि कितने बिलों में संशोधन हुआ, किन कारणों से हुआ और संशोधन से पहले दर्ज रीडिंग क्या थी। यदि किसी स्तर पर अनुचित लेनदेन की शिकायत मिलती है तो उसकी भी स्वतंत्र जांच जरूरी है।
• एक क्लिक से खुल सकता है पूरा रिकॉर्ड
विभागीय स्तर पर मीटर रीडर के लॉगिन, बिलिंग डेटा और अपलोड की गई मीटर तस्वीरों का मिलान कराया जाए तो काफी हद तक स्थिति स्पष्ट हो सकती है। जरूरत पड़े तो पिछले छह माह के बिलों का नमूना आधार पर ऑडिट और मौके पर सत्यापन कराया जा सकता है।
मामले में मांग है कि मुशाहिद रजा के कार्यक्षेत्र की बिलिंग का निष्पक्ष और तकनीकी आधार पर ऑडिट कराया जाए। यदि जांच में रीडिंग या बिलिंग प्रक्रिया में अनियमितता प्रमाणित होती है तो जिम्मेदारी तय कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
