सील होने के बाद भी ‘रसूख’ के दम पर चल रहे बलरामपुर के अवैध अस्पताल, प्रशासन मौन!
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नौशाद खान | ITN Hindi | 01 अप्रैल 2026
बलरामपुर/उतरौला: जनता की जान और गर्भवती महिलाओं की जिंदगी से खिलवाड़ करने वाले फर्जी अस्पतालों के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग के दावों की पोल खुलती नजर आ रही है। जिले में अवैध रूप से संचालित केंद्रों पर कार्रवाई तो हो रही है, लेकिन रसूख और भ्रष्टाचार के चलते ये केंद्र दोबारा धड़ल्ले से संचालित हो रहे हैं।
जांच में हुई थी अवैध गर्भपात की पुष्टि
बीते 15 मार्च (रविवार) को उतरौला के चिरकुटिया बाजार में डॉ. असरार खान की शिफा पालीक्लीनिक पर छापेमारी की गई थी। बिना पंजीकरण और अवैध गर्भपात की पुष्टि होने के बाद विभाग ने इसे सील कर दिया था। इसी तरह, सुबनजोत नहर गड़रैहिया के पास स्थित हदीशुन क्लीनिक को भी एक सप्ताह पहले सीज किया गया था। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि ये अस्पताल प्रशासन की नाक के नीचे दोबारा चालू हो चुके हैं।

भ्रष्टाचार के आरोप: ‘सील करो और पैसा लेकर खोल दो’
स्थानीय नागरिकों और शिकायतकर्ताओं का आरोप गंभीर है। लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग पहले दिखावे के लिए अस्पताल सीज करता है और फिर कथित ‘लेन-देन’ के बाद उन्हें दोबारा चलाने की खुली छूट दे दी जाती है। यह सीधे तौर पर आम जनता के विश्वास के साथ धोखाधड़ी है।

जिलाधिकारी से गुहार:
मामले की गंभीरता को देखते हुए शिकायतकर्ता मिर्जा गुलाम जिलानी बेग ने अब मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि विभागीय मिलीभगत की आशंका को देखते हुए अब वे सीधे जिलाधिकारी बलरामपुर से मुलाकात करेंगे और इन अवैध अस्पतालों के स्थायी समाधान की मांग करेंगे।
अधिकारियों का पक्ष:
मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) बलरामपुर, डॉ. मुकेश कुमार रस्तोगी ने कड़े लहजे में कहा है कि:
“अवैध रूप से चल रहे क्लीनिकों और डायग्नोस्टिक सेंटरों पर कार्रवाई निरंतर जारी है। यदि सीलिंग के बाद भी कोई केंद्र संचालित पाया जाता है, तो संबंधित संचालकों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई और मुकदमा दर्ज कराया जाएगा।”
