एफडी पर बिना जानकारी के 19.80 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत करने के आरोप में पूर्व बैंक प्रबंधक गिरफ्तार
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रिपोर्ट–आमिर हसन सिद्दीकी
श्रीदत्तगंज (बलरामपुर)। इंडियन बैंक की चमरूपुर-महदेईया शाखा में किसान की एफडी पर उसकी जानकारी के बिना ऋण स्वीकृत कर लाखों रुपये के गबन के मामले में पुलिस ने शाखा के पूर्व प्रबंधक को गिरफ्तार कर लिया है। इससे पहले इसी प्रकरण में सहायक शाखा प्रबंधक की गिरफ्तारी हो चुकी है। पुलिस कार्रवाई के बाद बैंकिंग व्यवस्था में अनियमितताओं को लेकर क्षेत्र में चर्चा तेज हो गई है।
पुलिस अधीक्षक विकास कुमार ने बताया कि उतरौला कोतवाली क्षेत्र के ग्राम नया नगर बिशुनपुर निवासी जनार्दन सिंह ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उन्होंने अपनी जमीन बेचकर प्राप्त 22 लाख रुपये इंडियन बैंक की चमरूपुर-महदेईया शाखा में जमा किए थे। आरोप है कि तत्कालीन शाखा प्रबंधक दिनेश कुमार पासवान और सहायक शाखा प्रबंधक निखिल कुमार पासवान ने उन्हें एफडी कराने के लिए प्रेरित किया। बाद में दोनों अधिकारियों ने कथित रूप से सांठगांठ कर एफडी के आधार पर 19 लाख 80 हजार रुपये का ऋण स्वीकृत कर दिया, जिसकी जानकारी खाताधारक को नहीं दी गई।
मामले की शिकायत मिलने के बाद थाना श्रीदत्तगंज पुलिस ने प्रकरण की गहन जांच शुरू की। जांच के दौरान बैंक अभिलेखों, लेनदेन संबंधी दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों का परीक्षण किया गया। प्रथम दृष्टया आरोप सही पाए जाने पर थाना श्रीदत्तगंज में मुकदमा संख्या 68/2026 धारा 316(5) एवं 318(4) बीएनएस के तहत दर्ज किया गया।
विवेचना के दौरान पुलिस ने मामले में शामिल लोगों की भूमिका की पड़ताल की। इसी क्रम में 30 मई को सहायक शाखा प्रबंधक निखिल कुमार पासवान को गिरफ्तार कर न्यायालय भेजा गया था। इसके बाद थाना श्रीदत्तगंज पुलिस ने फरार चल रहे पूर्व शाखा प्रबंधक दिनेश कुमार पासवान की तलाश तेज कर दी। पुलिस टीम लगातार संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही थी और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर उसकी गतिविधियों पर नजर रखी जा रही थी।
पुलिस अधीक्षक विकास कुमार के निर्देशन, अपर पुलिस अधीक्षक विशाल पाण्डेय एवं क्षेत्राधिकारी उतरौला राघवेन्द्र सिंह के पर्यवेक्षण में थानाध्यक्ष अविरल शुक्ला के नेतृत्व में गठित टीम ने मंगलवार को गोरखपुर जनपद के चिलुआताल क्षेत्र से आरोपी दिनेश कुमार पासवान को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को थाना लाकर पूछताछ की गई।
पुलिस के मुताबिक पूछताछ में आरोपी ने बताया कि बैंक का लक्ष्य पूरा करने के उद्देश्य से खाताधारक की 22 लाख रुपये की एफडी कराई गई थी। आरोप है कि इसके बाद एफडी के लगभग 90 प्रतिशत मूल्य के बराबर 19.80 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत कर खाताधारक के खाते में जमा किया गया। हालांकि पूरे मामले की विस्तृत जांच अभी जारी है और पुलिस अन्य तथ्यों की भी पड़ताल कर रही है।
थानाध्यक्ष अविरल शुक्ला ने बताया कि मामले से जुड़े सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच की जा रही है। प्रकरण में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
